भारतीय संविधान: मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक संपूर्ण अध्ययन मार्गदर्शिका - अनुच्छेद 12 से 35 तक का विश्लेषण।
परिचय एवं महत्व
भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार नागरिकों को राज्य की शक्तियों के विरुद्ध एक सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। ये राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना के लिए अनिवार्य हैं।
- मूल संरचना: मौलिक अधिकार संविधान की 'मूल संरचना' का हिस्सा हैं। इन्हें संशोधित किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।
- संरक्षण: इनका संरक्षण सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) और उच्च न्यायालय (High Court) दोनों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
1. समता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
समानता का अधिकार कानून के समक्ष सभी को एक समान मानता है और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करता है।
2. स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 19: इसमें वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है। प्रेस की स्वतंत्रता इसी के अंतर्गत आती है।
व्यापार की स्वतंत्रता: इस अधिकार का दावा भारत में रहने वाला ब्रिटिश नागरिक नहीं कर सकता।
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार
बाल श्रम निषेध (अनुच्छेद 24): 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों या किसी भी खतरनाक काम में लगाना कानूनी अपराध है।
संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इस अधिकार को 'संविधान की आत्मा और हृदय' कहा था। इसके माध्यम से नागरिक अधिकारों के हनन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सकते हैं।
विशेष तथ्य: संपत्ति का अधिकार (Right to Property) अब मौलिक अधिकार नहीं है। इसे 44वें संशोधन द्वारा एक कानूनी अधिकार बना दिया गया है (अनुच्छेद 300-A)।
अभ्यास प्रश्नोत्तरी (Quiz)
(A) अनुच्छेद 14 (B) अनुच्छेद 19 (1)(क) (C) अनुच्छेद 21 (D) अनुच्छेद 24
(A) समानता (B) स्वतंत्रता (C) संवैधानिक उपचार (D) शिक्षा का अधिकार
(A) अनुच्छेद 17 (B) अनुच्छेद 24 (C) अनुच्छेद 29 (D) अनुच्छेद 32
उत्तर कुंजी देखें (Check Answers)
1. (B) अनुच्छेद 19 (1)(क)
2. (C) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
3. (B) अनुच्छेद 24