UP GK Notes: उत्तर प्रदेश का प्राचीन इतिहास — 8 महाजनपद, बौद्ध एवं जैन धर्म
छठी शताब्दी ईसा पूर्व (6th Century BCE) में भारतीय उपमहाद्वीप में द्वितीय नगरीकरण की शुरुआत हुई। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय एवं जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में वर्णित 16 महाजनपदों में से 8 महाजनपद आधुनिक उत्तर प्रदेश की भौगोलिक सीमा में स्थित थे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश महात्मा बुद्ध की कर्मभूमि (बौद्ध धर्म का पालना) तथा अनेक जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली रहा है।
1. उत्तर प्रदेश के 8 महाजनपद (16 महाजनपद काल)
प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से आधे (8 महाजनपद) वर्तमान उत्तर प्रदेश के भूभाग में स्थित थे। प्रतियोगी परीक्षाओं में इनकी राजधानी और आधुनिक भौगोलिक स्थिति से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं:
| क्र. | महाजनपद | राजधानी | आधुनिक विस्तार (UP) | विशेष परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| 1 | काशी (Kashi) | वाराणसी | वाराणसी एवं आसपास का क्षेत्र | वरुणा एवं असी नदियों के मध्य बसा प्राचीनतम जीवंत नगर। |
| 2 | कौशल (Kosala) | श्रावस्ती (उत्तरी), कुशावती/अयोध्या (दक्षिणी) | अयोध्या, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती | प्रसिद्ध राजा प्रसेनजित यहाँ के शासक थे। सरयू नदी इसे दो भागों में बांटती थी। |
| 3 | वत्स (Vatsa) | कौशाम्बी | प्रयागराज एवं कौशाम्बी जिला | पौरव वंश के राजा उदयन यहाँ के शासक थे। बौद्ध व जैन दोनों का प्रमुख केंद्र। |
| 4 | मल्ल (Malla) | कुशीनारा (कुशीनगर) एवं पावा (पावापुरी/फाजिलनगर) | देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, गोरखपुर | गणतांत्रिक महाजनपद; बुद्ध का महापरिनिर्वाण (कुशीनारा) एवं महावीर का निर्वाण (पावा)। |
| 5 | पांचाल (Panchala) | अहिच्छत्र (उत्तरी - बरेली), काम्पिल्य (दक्षिणी - फर्रुखाबाद) | बरेली, बदायूं, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर | गंगा नदी इसे दो भागों में बांटती थी। कान्यकुब्ज (कन्नौज) इसी का भाग था। |
| 6 | शूरसेन (Shoorsena) | मथुरा | मथुरा एवं आसपास का ब्रज क्षेत्र | यदुवंश/वृष्णि कुल का शासन। बुद्ध काल में राजा अवंतिपुत्र यहाँ का शासक था। |
| 7 | चेदि (Chedi) | शुक्तिमती (सोथिवती) | बुंदेलखंड (बांदा, चित्रकूट, महोबा) | महाभारत कालीन राजा शिशुपाल यहीं का शासक था। केन नदी घाटी क्षेत्र। |
| 8 | कुरु (Kuru) | इंद्रप्रस्थ (हस्तिनापुर) | मेरठ, हापुड़ एवं दिल्ली-हरियाणा सीमा | हस्तिनापुर (मेरठ) कुरु वंश की मुख्य राजधानी थी। |
2. बौद्ध धर्म और उत्तर प्रदेश (बौद्ध धर्म का पालना)
उत्तर प्रदेश को 'बौद्ध धर्म का पालना' (Cradle of Buddhism) कहा जाता है, क्योंकि तथागत गौतम बुद्ध ने अपने संन्यास जीवन और उपदेशों का अधिकांश समय यहीं व्यतीत किया था।
- सारनाथ (ऋषिपत्तन / मृगदाव - वाराणसी): ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध ने अपने 5 संन्यासी शिष्यों को पहला उपदेश दिया, जिसे इतिहास में 'धर्मचक्रप्रवर्तन' कहा गया। यहाँ प्रसिद्ध धमेख स्तूप एवं अशोक स्तंभ (सिंह शीर्ष) स्थित है, जो भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बना।
- श्रावस्ती (सहेत-महेत): बुद्ध ने अपने जीवन में सर्वाधिक उपदेश और सर्वाधिक वर्षावास (25 वर्षावास) श्रावस्ती में ही बिताए। यहाँ अनाथपिंडक द्वारा दान दिया गया प्रसिद्ध 'जेतवन विहार' स्थित है और यहीं उन्होंने डाकू अंगुलिमाल को सुधारा था।
- कुशीनगर (कुशीनारा): मल्ल गणराज्य की राजधानी में 483 ई.पू. में 80 वर्ष की आयु में बुद्ध ने हिरण्यवती नदी के तट पर महापरिनिर्वाण (शरीर त्याग) प्राप्त किया। यहाँ महापरिनिर्वाण मंदिर और रामाभार स्तूप (अंतिम संस्कार स्थल) स्थित हैं।
- संकिसा (फर्रुखाबाद): बौद्ध मान्यता के अनुसार बुद्ध स्वर्ग से पृथ्वी पर स्वर्ण सीढ़ियों से यहीं अवतरित हुए थे। यहाँ सम्राट अशोक का हाथी शीर्ष स्तंभ (Elephant Pillar) मिला है।
- कौशाम्बी: वत्स नरेश उदयन के समय बुद्ध कई बार यहाँ पधारे। यहाँ प्रसिद्ध बौद्ध व्यापारी घोषित द्वारा निर्मित 'घोषिताराम विहार' स्थित है।
- कपिलवस्तु (पिपरहवा - सिद्धार्थनगर): शाक्य गणराज्य की राजधानी, जहाँ गौतम बुद्ध का प्रारंभिक राजसी जीवन बीता था। यहाँ उत्खनन में शाक्य कालीन स्तूप व बुद्ध के अस्थि कलश प्राप्त हुए हैं।
- देवदह (महराजगंज): भगवान बुद्ध का ननिहाल (माता महामाया एवं मौसी प्रजापति गौतमी का गृह नगर)।
3. जैन धर्म और उत्तर प्रदेश (तीर्थंकरों की तपोभूमि)
जैन परंपरा के अनुसार कुल 24 तीर्थंकरों में से 9 तीर्थंकरों की जन्मस्थली उत्तर प्रदेश की पावन भूमि रही है:
- अयोध्या (5 तीर्थंकरों की जन्मस्थली): प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ), द्वितीय अजितनाथ, चतुर्थ अभिनंदननाथ, पंचम सुमतिनाथ एवं चौदहवें अनंतनाथ का जन्म अयोध्या में हुआ था।
- वाराणसी (2 तीर्थंकर): 7वें तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ एवं 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का जन्म वाराणसी (अश्वसेन के कुल में) हुआ था।
- श्रावस्ती: 3वें तीर्थंकर भगवान संभवनाथ की जन्मस्थली (शोभनाथ मंदिर)।
- कौशाम्बी: 6वें तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभ की जन्मस्थली (पभोसा पहाड़ी)।
- मथुरा (कंकाली टीला): कुषाण काल में मथुरा जैन धर्म का बहुत बड़ा केंद्र था। यहाँ के 'कंकाली टीले' से प्रचुर मात्रा में जैन मूर्तियां, स्तूप और आयागपट्ट (पूजा शिलाएं) प्राप्त हुई हैं।
- महोबा एवं देवगढ़ (ललितपुर): चंदेल कालीन जैन प्रतिमाएं तथा देवगढ़ का प्रसिद्ध 'शांतिनाथ जैन मंदिर' जैन वास्तुकला के बेजोड़ उदाहरण हैं।
- पावापुरी (फाजिलनगर - कुशीनगर): 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने मल्ल गणराज्य के पावा में ही निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था।
- UP में महाजनपदों की संख्या: कुल 16 में से 8 महाजनपद आधुनिक उत्तर प्रदेश में थे।
- गणतांत्रिक महाजनपद: उत्तर प्रदेश में स्थित 'मल्ल' एक गणराज्य (Republic) था, जिसकी दो राजधानियां कुशीनारा और पावा थीं।
- बुद्ध के सर्वाधिक उपदेश: गौतम बुद्ध ने अपने जीवन के सर्वाधिक उपदेश कौशल की राजधानी श्रावस्ती में दिए थे।
- धमेख स्तूप एवं सिंह शीर्ष: दोनों विश्वप्रसिद्ध मौर्यकालीन संरचनाएं सारनाथ (वाराणसी) में स्थित हैं।
- जैन धर्म का कंकाली टीला: प्रसिद्ध कुषाण कालीन जैन कला का केंद्र मथुरा में स्थित है।
परीक्षा में बार-बार पूछे गए अभ्यास प्रश्न (PYQ Practice Set)
प्र. 1. छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 16 महाजनपदों में से कुल कितने महाजनपद वर्तमान उत्तर प्रदेश में स्थित थे?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 2. महात्मा बुद्ध ने अपने जीवन के सर्वाधिक उपदेश एवं वर्षावास किस स्थान पर दिए थे?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 3. प्राचीन 'वत्स' महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी किस नदी के तट पर स्थित थी?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 4. जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का जन्म उत्तर प्रदेश के किस नगर में हुआ था?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 5. 'कंकाली टीला', जो प्राचीन काल में जैन धर्म का एक प्रसिद्ध कला केंद्र था, कहाँ स्थित है?
उत्तर एवं व्याख्या
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