उत्तर प्रदेश का भौगोलिक विभाजन एवं जलवायु: भाबर, तराई, मैदान, पठार व वर्षा
9 नवंबर 2000 को पर्वतीय जिलों को काटकर उत्तराखंड बनाए जाने के बाद वर्तमान उत्तर प्रदेश का धरातल मुख्य रूप से तीन स्पष्ट भागों में दिखता है। राज्य की मिट्टी, कृषि और मौसम प्रणाली पूरी तरह से इसी धरातलीय बनावट पर टिकी हुई है। आइए, परीक्षा में सीधे पूछे जाने वाले तथ्यों को क्रमवार समझें:
1. उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख भौतिक प्रदेश
(क) भाबर एवं तराई का क्षेत्र
यह पट्टी राज्य के उत्तरी सिरे पर शिवालिक तलहटी में पश्चिम (सहारनपुर) से पूर्व (कुशीनगर/देवरिया) तक फैली है। इसके दो भिन्न रूप हैं:
- भाबर क्षेत्र:
- यह कंकड़-पत्थरों और मोटे बालू से बना अत्यंत छिद्रयुक्त (Porous) क्षेत्र है।
- पहाड़ों से उतरने वाली नदियां यहाँ पत्थरों के नीचे विलुप्त (Disappear) होकर भूमिगत बहने लगती हैं।
- कृषि के लिए यह इलाका अनुपयुक्त है। पश्चिम (सहारनपुर) में इसकी चौड़ाई लगभग 34 किमी तक है, लेकिन पूर्व की ओर बढ़ने पर यह बहुत संकरा हो जाता है।
- तराई क्षेत्र:
- भाबर के ठीक दक्षिण में महीन कणों और कांप मिट्टी से बना दलदली व नम मैदान है।
- भाबर में छिपी नदियां तराई में फिर से सतह पर प्रकट हो जाती हैं।
- अधिक वर्षा और नमी के कारण यहाँ घने जंगल और ऊंची सवाना जैसी 'हाथी घास' मिलती है।
- जलभराव की अनुकूलता के कारण यह क्षेत्र धान (चावल) और गन्ने की खेती का सबसे बड़ा केंद्र है।
(ख) मध्य का मैदानी क्षेत्र (गंगा-यमुना का मैदान)
- उत्तर के तराई और दक्षिण के पठार के बीच फैला यह इलाका गंगा, यमुना, गोमती, घाघरा, शारदा और राप्ती जैसी नदियों की लाई जलोढ़ (Alluvial) मिट्टी से बना है।
- इस मैदान का सामान्य ढाल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की तरफ है।
- मिट्टी के अनुसार इसे दो रूपों में समझा जाता है:
- खादर (नवीन जलोढ़): नदियों के कछार जहां हर साल बाढ़ का नया गाद जमा होता है। यह अत्यंत उर्वर भूमि है।
- बांगर (पुरातन जलोढ़): तुलनात्मक रूप से ऊंचे टीले जहां सामान्यतः बाढ़ का पानी नहीं चढ़ पाता। लंबे समय तक सिंचाई और जलभराव से कई जगह 'रेह' या 'ऊसर' क्षारीय परत बन जाती है।
(ग) दक्षिण का पठारी क्षेत्र (बुंदेलखंड एवं बघेलखंड)
- यह दक्कन के प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तरी छोर है। इसके अंतर्गत कुल 11 जिले आते हैं (झांसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, तथा प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र व चंदौली के दक्षिणी भाग)।
- यहाँ नीस और ग्रेनाइट चट्टानों के अपक्षय से लाल मिट्टी (रांकर, परुआ, मार, काबर) बनी है।
- पानी की कमी और पथरीली जमीन के कारण यहाँ रबी में चना, अरहर, मसूर जैसी दलहनी और तिलहनी फसलें प्रमुखता से उगाई जाती हैं।
- विंध्य पर्वत श्रृंखला की कैमूर व सोनकर पहाड़ियां इसी क्षेत्र में (मिर्जापुर-सोनभद्र) लगभग 600 मीटर तक ऊंची हैं।
2. उत्तर प्रदेश की जलवायु (Climate Classification)
समुद्र से दूर होने के कारण प्रदेश की जलवायु उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी (Sub-tropical Monsoon) है, जिसमें महाद्वीपीय प्रभाव (सर्दियों में अधिक ठंड, गर्मियों में तेज गर्मी) दिखता है।
- कोपेन के अनुसार: उत्तर प्रदेश का अधिकांश भाग 'Cwg' प्रकार (शुष्क शीत ऋतु वाला मानसूनी प्रकार) के अंतर्गत आता है।
- थॉर्नथवेट के अनुसार: राज्य का अधिकांश मैदान 'CB'w' (अर्द्ध-शुष्क/उपोष्ण कटिबंधीय आर्द्र) वर्ग में पड़ता है।
3. प्रमुख ऋतुएं एवं उनकी मौसमी विशेषताएं
| ऋतु | अवधि | परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| ग्रीष्म ऋतु | मध्य मार्च से जून | मई-जून में चलने वाली शुष्क व झुलसाने वाली पश्चिमी हवाओं को 'लू' कहते हैं। कर्क रेखा के नजदीक होने से बुंदेलखंड में तापमान 45°C से 48°C तक पहुँच जाता है। |
| वर्षा ऋतु | जून के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर | प्रदेश की कुल वर्षा का 75% से 85% भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा (पूर्वा) से मिलता है। |
| शीत ऋतु | अक्टूबर से फरवरी | जनवरी सबसे ठंडा महीना होता है। भूमध्य सागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण उत्तर-पश्चिम भागों में हल्की चक्रवातीय वर्षा होती है, जो गेहूं की रबी फसल के लिए अमृत मानी जाती है। |
4. वर्षा का प्रादेशिक वितरण (Rainfall Distribution)
बंगाल की खाड़ी से आने वाली आर्द्र मानसूनी हवाएं जब पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ती हैं, तो उनमें नमी कम होती जाती है। इसीलिए पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है:
- तराई का मैदान: सर्वाधिक वार्षिक वर्षा प्राप्त करता है (औसतन 120 सेमी से 180 सेमी तक)।
- पूर्वी मैदान: औसतन 100 से 120 सेमी तक वर्षा।
- मध्यवर्ती मैदान: औसतन 80 से 100 सेमी तक वर्षा।
- पश्चिमी मैदान व बुंदेलखंड: सबसे कम वर्षा प्राप्त करते हैं (औसतन 50 से 75 सेमी)।
- सर्वाधिक वर्षा वाला जिला: गोरखपुर (लगभग 184.7 सेमी - तराई क्षेत्र)।
- सबसे कम वर्षा वाला जिला: मथुरा (लगभग 54.4 सेमी - पश्चिमी सीमांत)।
- सर्वाधिक औसत तापमान: आगरा एवं झांसी (बुंदेलखंड)।
- न्यूनतम औसत तापमान: बरेली।
- राज्य की औसत वार्षिक वर्षा: लगभग 95 सेमी।
परीक्षा में बार-बार पूछे गए अभ्यास प्रश्न (PYQ Practice Set)
प्र. 1. कंकड़-पत्थरों से निर्मित वह भू-भाग जहाँ नदियां सतह से लुप्त होकर भूमिगत बहने लगती हैं, कहलाता है:
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 2. उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की किस शाखा से सर्वाधिक वर्षा प्राप्त होती है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 3. उत्तर प्रदेश में सबसे कम और सर्वाधिक वर्षा वाले जिले क्रमशः कौन से हैं?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 4. शीत ऋतु में रबी फसलों के लिए लाभदायक चक्रवातीय वर्षा का प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 5. कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार उत्तर प्रदेश का अधिकांश भाग किस वर्ग के अंतर्गत आता है?
उत्तर एवं व्याख्या
👉 https://t.me/toppersaddaofficial