उत्तर प्रदेश की मिट्टियां, प्रमुख फसलें एवं 9 कृषि जलवायु क्षेत्र (Agro-Climatic Zones)
उत्तर प्रदेश एक विशाल कृषि प्रधान राज्य है। भू-आकृतिक विविधता के कारण राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टियों की संरचना, उर्वरा शक्ति और फसल चक्र में गहरा अंतर पाया जाता है। गंगा-यमुना के मैदान में उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी मिलती है, तो दक्षिण के पठारी भाग में लाल-काली मिट्टी का विस्तार है। योजना आयोग द्वारा राज्य को 9 कृषि जलवायु क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है।
1. उत्तर प्रदेश की मिट्टियों का भौगोलिक वर्गीकरण
(A) भाबर एवं तराई क्षेत्र की मिट्टी
- भाबर की मिट्टी: कंकड़-पत्थरों और मोटे बालू से निर्मित अत्यंत छिद्रयुक्त मिट्टी। इसमें जल टिकता नहीं, जिस कारण यह कृषि कार्य के लिए अनुपयुक्त है।
- तराई की मिट्टी: महीन कणों, कांप और जीवांश (Humus) युक्त दलदली व नम मिट्टी। इसमें नाइट्रोजन और जैविक पदार्थों की प्रचुरता होती है। यह गन्ना और धान (चावल) की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
(B) मध्य मैदानी क्षेत्र की जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil)
- खादर मिट्टी (नवीन जलोढ़): नदियों के बाढ़ प्रभावित कछारी क्षेत्रों में पाई जाने वाली महीन गाद युक्त उपजाऊ मिट्टी। इसका रंग हल्का भूरा होता है। इसमें चूना, पोटाश और मैग्नीशियम पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। इसमें रासायनिक खाद की कम आवश्यकता पड़ती है।
- बांगर मिट्टी (पुरातन जलोढ़): ऊंचे मैदानी भागों की परिपक्व मिट्टी, जहाँ बाढ़ का पानी सामान्यतः नहीं पहुँच पाता। इसे मटियार, दोमट या उपहार मिट्टी भी कहते हैं।
- ऊसर / रेह / कल्लर मिट्टी: बांगर क्षेत्र में अत्यधिक सिंचाई और खराब जल निकास के कारण सतह पर सोडियम और मैग्नीशियम लवणों की सफेद परत जम जाती है। ऐसी क्षारीय मिट्टी को सुधारने के लिए जिप्सम (Gypsum) अथवा पाइराइट्स का उपयोग किया जाता है।
(C) दक्षिण के पठारी भाग (बुंदेलखंड एवं विंध्य) की मिट्टियां
नीस और ग्रेनाइट चट्टानों के अपक्षय से निर्मित बुंदेलखंड की मिट्टियों को मुख्य रूप से दो भागों (काली एवं लाल) में विभाजित किया जाता है:
| स्थानीय नाम | प्रकृति व बनावट | प्रमुख फसलें |
|---|---|---|
| मार (मांड) मिट्टी | काली मिट्टी का रूप; अत्यधिक लिसलिसी व चिपचिपी। सूखने पर गहरी दरारें पड़ जाती हैं। | चना, गेहूं, कपास |
| काबर मिट्टी | गहरे काले या सलेटी रंग की बारीक कणों वाली मिट्टी (रेगुर जैसी)। | गेहूं, चना, तिलहन |
| परुआ (पड़वा) मिट्टी | हल्की लाल रंग की रेतीली दोमट मिट्टी (हमीरपुर, जालौन में प्रमुखता से)। | ज्वार, बाजरा, चना |
| रांकर मिट्टी | पठारी ढलानों पर पाई जाने वाली कंकरीली, पथरीली व अनुर्वर लाल मिट्टी। | तिल, अलसी, मोटे अनाज |
| भोंटा मिट्टी | विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की तलहटी (मिर्जापुर-सोनभद्र) में पाई जाने वाली लाल मिट्टी। | दलहन व मोटे अनाज |
2. उत्तर प्रदेश के 9 कृषि जलवायु क्षेत्र (Agro-Climatic Zones)
मिट्टी की संरचना, तापमान, वर्षा और फसल पैटर्न के आधार पर योजना आयोग द्वारा राज्य को कुल 9 कृषि जलवायु क्षेत्रों में बांटा गया है:
| क्र. | कृषि जलवायु क्षेत्र | शामिल प्रमुख जिले व विशेषताएं |
|---|---|---|
| 1 | तराई क्षेत्र | सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती (उच्च वर्षा, गन्ना-धान बाहुल्य)। |
| 2 | पश्चिमी मैदानी क्षेत्र | मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर (सर्वाधिक कृषि उत्पादकता, हरित क्रांति क्षेत्र)। |
| 3 | मध्य-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र | बरेली, मुरादाबाद, बदायूं, शाहजहांपुर, संभल, अमरोहा। |
| 4 | दक्षिण-पश्चिमी अर्द्ध-शुष्क क्षेत्र | आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, हाथरस (न्यूनतम वर्षा, बाजरा व सरसों)। |
| 5 | मध्य मैदानी क्षेत्र | लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर। |
| 6 | बुंदेलखंड क्षेत्र | झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट (सूखा प्रवण क्षेत्र, दलहन व तिलहन का कटोरा)। |
| 7 | उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र | गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर। |
| 8 | पूर्वी मैदानी क्षेत्र | वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, अयोध्या, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़। |
| 9 | विंध्य क्षेत्र | मिर्जापुर, सोनभद्र तथा प्रयागराज का दक्षिणी पठारी क्षेत्र। |
3. प्रमुख फसलें एवं कृषि उत्पादन तथ्य
🏆 भारत में प्रथम स्थान (Highest Producer):
- गेहूं: उत्तर प्रदेश की प्रमुख रबी फसल है। राज्य के कुल कृषि क्षेत्र के लगभग 24% भाग पर बोया जाता है। हरदोई व गोरखपुर प्रमुख उत्पादक जिले हैं।
- चावल: प्रमुख खरीफ फसल है। तराई एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश (सहारनपुर, सिद्धार्थनगर का 'काला नमक' चावल जीआई टैग प्राप्त) प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।
- गन्ना: राज्य की सबसे प्रमुख नकदी फसल है। मेरठ, मुजफ्फरनगर और लखीमपुर खीरी गन्ने के बड़े उत्पादक हैं।
- आंवला: देश में सर्वाधिक आंवला उत्पादन प्रतापगढ़ जिले में होता है।
- अफीम: राज्य में अफीम की एकमात्र सरकारी फैक्ट्री गाजीपुर में है, जबकि सर्वाधिक अफीम उत्पादन बाराबंकी में होता है।
- पान की खेती: महोबा जिला अपनी प्रसिद्ध पान की खेती और पान अनुसंधान केंद्र के लिए जाना जाता है।
- कृषि जलवायु क्षेत्र (Agro-Climatic Zones): उत्तर प्रदेश में कुल 9 कृषि जलवायु क्षेत्र हैं।
- बुंदेलखंड की कपास मिट्टी: बुंदेलखंड में पाई जाने वाली 'रेगुर' अथवा काली मिट्टी को स्थानीय स्तर पर मार (मांड) एवं काबर कहा जाता है।
- क्षारीय मृदा का उपचार: क्षारीय/ऊसर मिट्टी को सुधारने के लिए जिप्सम का प्रयोग किया जाता है।
- किसान बही योजना: उत्तर प्रदेश में किसान बही योजना की शुरुआत वर्ष 1992 में की गई थी।
- चकबंदी योजना: राज्य में चकबंदी योजना का प्रारंभ वर्ष 1954 (मुजफ्फरनगर की कैराना व सुल्तानपुर की मुसाफिरखाना तहसील) से हुआ था।
परीक्षा में बार-बार पूछे गए अभ्यास प्रश्न (PYQ Practice Set)
प्र. 1. उत्तर प्रदेश को कुल कितने कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) में विभाजित किया गया है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 2. बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली काली मिट्टी को स्थानीय भाषा में किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 3. उत्तर प्रदेश में अफीम की एकमात्र सरकारी फैक्ट्री किस जिले में स्थित है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 4. उत्तर प्रदेश में 'किसान बही योजना' किस वर्ष लागू की गई थी?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 5. उत्तर प्रदेश का कौन सा जिला आंवला उत्पादन के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है?
उत्तर एवं व्याख्या
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