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UPSSSC PET Hindi Notes PDF: सामान्य हिंदी व्याकरण व अपठित गद्यांश

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UPSSSC PET New Exam Date: 25, 30 Oct & 01 Nov 2026

सामान्य हिंदी एवं गद्यांश (15 अंक) संपूर्ण अभ्यास में शेष समय:

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UPSSSC PET Hindi Notes PDF & Full Comprehension Practice: उत्तर प्रदेश प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) के 100 अंकों के पाठ्यक्रम में सामान्य हिंदी खंड कुल 15 अंकों (15 प्रश्नों) का अत्यंत निर्णायक व उच्च-स्कोरिंग भाग है। इसमें 5 अंक मानक हिंदी व्याकरण (संधि, विलोम, पर्यायवाची, वाक्यांशों के लिए एक शब्द, मुहावरे, लिंग व समश्रुत भिन्नार्थक शब्द) तथा 10 अंक दो विस्तृत अपठित गद्यांशों (प्रत्येक पर 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न) से पूछे जाते हैं। यदि आप upsssc pet hindi notes, upsssc pet short notes pdf in hindi या upsssc pet hindi passage tricks in hindi खोज रहे हैं, तो यहाँ सम्पूर्ण व्याकरण नियमों के साथ वास्तविक परीक्षा पैटर्न पर आधारित 4 विकल्पों (A, B, C, D) वाले 2 पूर्ण गद्यांश हल सहित संकलित हैं।

15 Marks
व्याकरण (5 अंक) + गद्यांश (10 अंक)
10 MCQs with Options
2 विस्तृत गद्यांश (4 विकल्पों सहित)
Syllabus Focus
संधि, विलोम, पर्यायवाची व मुहावरे
1. UPSSSC PET सामान्य हिंदी व्याकरण: संपूर्ण नियम व उदाहरण तालिकाएं

आयोग द्वारा विगत 5 वर्षों (2021 से 2025) में बार-बार पूछे गए सबसे महत्वपूर्ण शब्द संग्रह:

संधि का प्रकार प्रमुख शब्द संधि-विच्छेद लागू होने वाला नियम
अयादि स्वर संधि पावक, नायक, नयन, पवन पौ + अक, नै + अक, ने + अन, पो + अन ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई भिन्न स्वर आने पर क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् बनता है।
गुण स्वर संधि महोत्सव, सूर्योदय, देवेंद्र, महर्षि महा + उत्सव, सूर्य + उदय, देव + इंद्र, महा + ऋषि अ/आ के साथ इ/ई मिले तो 'ए', उ/ऊ मिले तो 'ओ' तथा ऋ मिले तो 'अर्' हो जाता है।
यण स्वर संधि इत्यादि, प्रत्येक, स्वागत, अन्वय इति + आदि, प्रति + एक, सु + आगत, अनु + अय इ/ई, उ/ऊ, ऋ के बाद असमान स्वर आने पर क्रमशः य्, व्, र् बन जाता है।
विसर्ग संधि मनोहर, यशोदा, निश्छल, दुस्तर मनः + हर, यशः + दा, निः + छल, दुः + तर विसर्ग के बाद सघोष वर्ण या च/छ/त आने पर विसर्ग ओ, श या स् में बदलता है।
व्यंजन संधि उज्ज्वल, सज्जन, वागीश, तल्लीन उत् + ज्वल, सत् + जन, वाक् + ईश, तत् + लीन 'त्' का मेल 'ज्' से होने पर त् → ज् तथा वर्ग के प्रथम वर्ण का तीसरे वर्ण में परिवर्तन।
विलोम शब्द (Antonyms) पर्यायवाची शब्द (Synonyms) वाक्यांश के लिए एक शब्द (One Word)
• स्थावर ↔ जंगम
• तिमिर ↔ आलोक
• गरिमा ↔ लघिमा
• अल्पज्ञ ↔ बहुज्ञ / सर्वज्ञ
• अनुराग ↔ विराग
• कमल: अरविंद, जलज, सरोज, राजीव, पुंडरीक
• अग्नि: पावक, अनल, हुताशन, वैश्वानर
• हवा: मारुत, वात, समीर, अनिल
• जंगल: अरण्य, कानन, विपिन, कांतार
• बिजली: दामिनी, चंचला, विद्युत, तड़ित
• जिसे जीता न जा सके → अजेय
• जिसे बुलाया न गया हो → अनाहूत
• पर्वत के नीचे की तलहटी भूमि → उपत्यका
• पर्वत के ऊपर की समतल भूमि → अधित्यका
• जो सबमें व्याप्त हो → सर्वव्यापी
प्रमुख मुहावरे एवं लोकोक्तियां समश्रुत भिन्नार्थक शब्द (उच्चारण समान, अर्थ भिन्न)
• गागर में सागर भरना: विस्तृत बात को अत्यंत संक्षेप में कहना।
• काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती: छल-कपट का व्यवहार सदैव सफल नहीं होता।
• अंधे की लाठी होना: असहाय का एकमात्र सहारा बनना।
• कलम तोड़ना: अत्यंत सुंदर एवं मर्मस्पर्शी रचना लिखना।
• अनल (आग) — अनिल (वायु)
• अंश (भाग/हिस्सा) — अंस (कंधा)
• अली (भौंरा) — आली (सखी/सहेली)
• अवलंब (सहारा) — अविलंब (शीघ्र/बिना देर किए)
2. अपठित गद्यांश 1: राष्ट्र निर्माण, नागरिक चरित्र एवं नैतिक शिक्षा

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 1 से 5) के सही विकल्प का चयन कीजिए:

"किसी भी राष्ट्र की वास्तविक संप्रभुता और गरिमा उसके विशाल भौगोलिक विस्तार, गगनचुंबी अट्टालिकाओं अथवा अत्याधुनिक शस्त्रागारों में परिलक्षित नहीं होती, अपितु उस राष्ट्र के जनमानस के चारित्रिक उत्कर्ष, नैतिक चेतना और नागरिक उत्तरदायित्वों के निष्ठावान निर्वहन में निहित होती है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब किसी समाज में भौतिक समृद्धि का आधिक्य हुआ और नैतिक मूल्यों का क्रमिक अवमूल्यन हुआ, तब-तब वह सभ्यता आंतरिक दुर्बलताओं के कारण पराभव की ओर अग्रसर हो गई। प्राचीन काल में रोम और बेबीलोन के भव्य साम्राज्य वैभव के चरमोत्कर्ष पर पहुंचकर भी इसीलिए विनष्ट हुए क्योंकि उनके नागरिकों का नैतिक संतुलन विचलित हो गया था।

एक सुदृढ़ और विकासशील राष्ट्र की आधारशिला उसके कर्मठ, सत्यनिष्ठ और स्वार्थरहित नागरिकों के संकल्प पर टिकी होती है। आज की तीव्र विकासोन्मुख व्यवस्था में हमारी शिक्षा प्रणाली का प्रमुख लक्ष्य मात्र जीविकोपार्जन और उपाधि-प्राप्ति तक सीमित होकर रह गया है। यह प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है। शिक्षा जब तक व्यक्ति को संवेदनशील, सामाजिक रूप से उत्तरदायी और चारित्रिक रूप से दृढ़ नहीं बनाती, तब तक वह समग्र मानव विकास की संवाहिका नहीं बन सकती। युवा पीढ़ी को यह मर्म समझना होगा कि समाज से अधिकारों की निरंतर मांग करने से पूर्व, देश के प्रति अपने मौलिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना ही सर्वोपरि राष्ट्रधर्म है। चरित्र बल के अभाव में बौद्धिक चातुर्य समाज के लिए वरदान नहीं, अपितु विनाशकारी अभिशाप सिद्ध होता है।"
प्रश्न 1: उपर्युक्त गद्यांश का सर्वाधिक सटीक एवं उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?
(A) प्राचीन साम्राज्यों का वैभव
(B) आधुनिक शिक्षा और जीविकोपार्जन
(C) राष्ट्र निर्माण में चारित्रिक बल और नैतिक शिक्षा
(D) अधिकारों की मांग और युवा वर्ग
सही उत्तर: (C) राष्ट्र निर्माण में चारित्रिक बल और नैतिक शिक्षा
व्याख्या: संपूर्ण अनुच्छेद में केवल बाह्य भौतिक प्रगति की निरर्थकता बताते हुए आंतरिक चरित्र निर्माण और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षा को राष्ट्र का मूल आधार सिद्ध किया गया है।
प्रश्न 2: गद्यांश के अनुसार रोम और बेबीलोन जैसी प्राचीन सभ्यताओं के पतन का मुख्य कारण क्या था?
(A) अत्यधिक बाह्य सैन्य आक्रमण
(B) भौतिक संपन्नता के बीच नैतिक मूल्यों का अवमूल्यन
(C) प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप
(D) आर्थिक रूप से दरिद्रता का प्रसार
सही उत्तर: (B) भौतिक संपन्नता के बीच नैतिक मूल्यों का अवमूल्यन
व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है कि ये भव्य साम्राज्य वैभव के शिखर पर पहुंचकर भी इसलिए विनष्ट हुए क्योंकि उनके नागरिकों का नैतिक संतुलन विचलित हो गया था।
प्रश्न 3: गद्यांश में प्रयुक्त शब्द 'जीविकोपार्जन' का शुद्ध संधि-विच्छेद क्या है?
(A) जीविक + उपार्जन
(B) जीविका + उपार्जन
(C) जीविको + पार्जन
(D) जीविका + अपार्जन
सही उत्तर: (B) जीविका + उपार्जन
व्याख्या: यह गुण स्वर संधि का उदाहरण है। यहाँ 'जीविका' के अंतिम स्वर 'आ' तथा 'उपार्जन' के प्रथम स्वर 'उ' के योग से 'ओ' बनता है (आ + उ = ओ)।
प्रश्न 4: गद्यांश में आए शब्द 'पराभव' का सर्वाधिक उपयुक्त विलोम शब्द कौन सा है?
(A) पराजय
(B) अवमूल्यन
(C) उत्कर्ष / विजय
(D) विनाशी
सही उत्तर: (C) उत्कर्ष / विजय
व्याख्या: 'पराभव' का शाब्दिक अर्थ पराजय, हार या पतन होता है। अतः इसका सही विलोम शब्द 'उत्कर्ष' या 'विजय' होगा।
प्रश्न 5: लेखक के अनुसार 'बौद्धिक चातुर्य' किस स्थिति में समाज के लिए अभिशाप बन जाता है?
(A) जब व्यक्ति उच्च उपाधियां प्राप्त कर ले
(B) जब व्यक्ति केवल वैज्ञानिक प्रगति करे
(C) जब उसमें चारित्रिक बल और नैतिकता का अभाव हो
(D) जब वह अपने अधिकारों की मांग न करे
सही उत्तर: (C) जब उसमें चारित्रिक बल और नैतिकता का अभाव हो
व्याख्या: गद्यांश की अंतिम पंक्ति के अनुसार चरित्र बल के अभाव में बौद्धिक चतुराई समाज के लिए वरदान नहीं, अपितु विनाशकारी अभिशाप सिद्ध होती है।
3. अपठित गद्यांश 2: पर्यावरण संकट, औद्योगीकरण व सतत विकास

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 6 से 10) के सही विकल्प का चयन कीजिए:

"मानव और प्रकृति का साहचर्य अनादि काल से अन्योन्याश्रित रहा है। प्रकृति ने मनुष्य को अपनी गोद में एक ममतामयी धात्री की भांति पाला-पोसा है तथा उसके अस्तित्व और विकास के लिए स्वच्छ समीर, अमृततुल्य सलिल और उर्वरा वसुंधरा का अक्षय भंडार उन्मुक्त भाव से अर्पित किया है। भारतीय संस्कृति के वैदिक ऋचाओं में पृथ्वी को 'माता' और मानव को उसका 'पुत्र' मानकर वंदना की गई थी। किंतु पिछली दो शताब्दियों में विज्ञान के चमत्कारों से अभिभूत होकर मनुष्य ने अपने इस शाश्वत संबंध को विस्मृत कर दिया। आधुनिकता के उन्माद और अंधाधुंध औद्योगीकरण ने प्रकृति को उपभोग्य वस्तु मानकर उसका निर्मम दोहन प्रारंभ कर दिया है।

वनों की निर्बाध कटाई ने न केवल जैव विविधता को गंभीर संकट में धकेल दिया है, अपितु वैश्विक तापमान (ग्लोबल वॉर्मिंग) और अनियमित ऋतुचक्र के रूप में संपूर्ण मानवता के समक्ष अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। औद्योगिक अवशिष्टों से हमारी पुण्यसलिला नदियां आज विषाक्त नालों में परिवर्तित हो चुकी हैं तथा महानगरों का वायुमंडल विषैली गैसों का आवरण बन चुका है। हमें यह भली-भांति हृदयंगम करना होगा कि प्रकृति का संहार करके मानव कभी चिरंजीवी नहीं हो सकता। विकास की जो अवधारणा पर्यावरण की बलि पर आधारित हो, वह वस्तुतः विकास नहीं, आत्मघाती विनाश का मार्ग है। समय रहते यदि हमने सतत विकास (Sustainable Development) और संयमित उपभोग के सिद्धांत को नहीं अपनाया, तो भावी पीढ़ियों के लिए यह वसुंधरा जीवन-विहीन मरुस्थल बनकर रह जाएगी।"
प्रश्न 6: 'मानव और प्रकृति का संबंध अन्योन्याश्रित रहा है' - इस कथन का क्या आशय है?
(A) मानव प्रकृति पर पूर्णतः शासन करता है
(B) मानव और प्रकृति एक-दूसरे के अस्तित्व के लिए परस्पर आश्रित हैं
(C) प्रकृति को मानव की कोई आवश्यकता नहीं है
(D) दोनों का संबंध केवल आधुनिक युग की देन है
सही उत्तर: (B) मानव और प्रकृति एक-दूसरे के अस्तित्व के लिए परस्पर आश्रित हैं
व्याख्या: 'अन्योन्याश्रित' शब्द का अर्थ है एक-दूसरे पर आश्रित या परस्पर निर्भर होना।
प्रश्न 7: वैदिक संस्कृति में प्रकृति और मनुष्य के संबंध को किस रूप में निरूपित किया गया था?
(A) स्वामी और सेवक के रूप में
(B) माता और पुत्र के पवित्र संबंध के रूप में
(C) उपभोक्ता और वस्तु के रूप में
(D) प्रतिस्पर्धी शक्तियों के रूप में
सही उत्तर: (B) माता और पुत्र के पवित्र संबंध के रूप में
व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है कि वेदों में पृथ्वी को 'माता' तथा मनुष्य को उसका 'पुत्र' मानकर आदर व संरक्षण का संदेश दिया गया था।
प्रश्न 8: गद्यांश में प्रयुक्त शब्द 'सलिल' और 'वसुंधरा' का क्रमशः सही पर्यायवाची युग्म कौन सा है?
(A) पवन और आकाश
(B) जल और पृथ्वी
(C) अग्नि और पर्वत
(D) अमृत और समुद्र
सही उत्तर: (B) जल और पृथ्वी
व्याख्या: 'सलिल' जल/नीर/वारि का पर्यायवाची है तथा 'वसुंधरा' पृथ्वी/धरा/अवनि का पर्यायवाची शब्द है।
प्रश्न 9: 'निर्मम' शब्द में किस उपसर्ग का प्रयोग हुआ है तथा इसका क्या अर्थ है?
(A) निर् उपसर्ग (ममता-रहित / क्रूर)
(B) नि उपसर्ग (ममता सहित)
(C) निर उपसर्ग (सुंदर)
(D) मम् उपसर्ग (अहंकार)
सही उत्तर: (A) निर् उपसर्ग (ममता-रहित / क्रूर)
व्याख्या: 'निर्मम' शब्द निर् + मम से बना है, जिसका अर्थ ममता-शून्य, दया-रहित या क्रूर दोहन होता है।
प्रश्न 10: लेखक के अनुसार वर्तमान समय में 'सतत विकास' (Sustainable Development) क्यों अनिवार्य है?
(A) ताकि औद्योगीकरण को पूरी तरह रोका जा सके
(B) ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर भावी पीढ़ी का अस्तित्व सुरक्षित रहे
(C) ताकि केवल शहरों का विस्तार किया जा सके
(D) ताकि वनों की कटाई को वैधानिक मान्यता मिले
सही उत्तर: (B) ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर भावी पीढ़ी का अस्तित्व सुरक्षित रहे
व्याख्या: गद्यांश के अंत में चेतावनी दी गई है कि संयमित उपभोग और सतत विकास के अभाव में वसुंधरा जीवन-विहीन मरुस्थल बन जाएगी।
4. UPSSSC PET परीक्षा में गद्यांश हल करने के 3 अचूक नियम
नियम 1 (Question-First Strategy): सबसे पहले 30 सेकंड में सभी 5 प्रश्नों और विकल्पों को पढ़ें। इससे जब आप गद्यांश पढ़ेंगे, तो आपके मस्तिष्क में पहले से पता होगा कि किस वाक्य से प्रश्न पूछा गया है।
नियम 2 (No Out-of-Passage Bias): गद्यांश में दी गई जानकारी को ही परम सत्य मानें। अपने व्यक्तिगत ज्ञान या बाह्य विचारों को उत्तर में कभी न जोड़ें।
नियम 3 (Title Selection Rule): शीर्षक हमेशा गद्यांश के पहले दो वाक्यों या अंतिम दो वाक्यों के केंद्रीय भाव (Central Theme) में छिपा होता है। जो विषय शुरू से अंत तक गद्यांश की धुरी रहे, वही सही शीर्षक होता है।
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