UP GK Notes: उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियां | Scheduled Tribes of UP | Rituals, Culture & Districts
उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना में अनुसूचित जनजातियां (Scheduled Tribes) विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। 2003 से पूर्व राज्य में केवल 2 जनजातियां (थारू और बुक्सा) ही अधिसूचित थीं, किंतु केंद्र सरकार द्वारा 2003 में 10 नई जनजातियों को शामिल करने के पश्चात अब राज्य में कुल 12 अनुसूचित जनजातियां अधिसूचित हैं। तराई क्षेत्र की थारू व बुक्सा, ललितपुर की सहरिया तथा सोनभद्र की गोंड, बैगा, चेरो, खरवार जनजातियों के सामाजिक रीति-रिवाज एवं जिले प्रतियोगी परीक्षाओं के सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषयों में से हैं।
1. उत्तर प्रदेश में जनजातीय सांख्यिकी (Census 2011 Data)
- कुल जनजाति जनसंख्या: 11,34,273 (उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या का मात्र 0.6%)।
- देश की कुल ST जनसंख्या में हिस्सा: 1.09%।
- सर्वाधिक जनजाति जनसंख्या वाला जिला: सोनभद्र (यहाँ राज्य की सर्वाधिक जनजातियां निवास करती हैं; सोनभद्र को 'भारत की जनजातीय राजधानी' भी कहा जाता है)।
- न्यूनतम जनजाति जनसंख्या वाला जिला: बागपत।
- जनजाति-शून्य जिले: उत्तर प्रदेश के अयोध्या एवं जालौन जिलों में 2011 की जनगणना के अनुसार कोई भी अनुसूचित जनजाति (ST) आबादी दर्ज नहीं की गई है।
- जनजाति प्रतिशतता का क्रम: सोनभद्र (20.7%) > बलिया (3.4%) > देवरिया (3.5%)।
2. उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियां: समाज, संस्कृति एवं रीति-रिवाज
- थारू जनजाति (Tharu Tribe) - सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति:
- निवास क्षेत्र: उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र—विशेषकर लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर एवं महाराजगंज।
- मूल व शारीरिक बनावट: ये किरात वंश से संबंधित माने जाते हैं। इनका कद छोटा, चौड़ा मुखड़ा, पीला वर्ण और कम दाढ़ी-मूंछ होती है।
- परिवार एवं विवाह व्यवस्था: इनमें संयुक्त परिवार प्रथा पाई जाती है। मातृसत्तात्मक सत्ता के लक्षण मिलते हैं (महिलाओं को घर में सर्वोच्च सम्मान)। विवाह तय होने को 'पक्की पोढ़ी' कहा जाता है। विवाह में दोनों पक्षों द्वारा दिया जाने वाला भोज 'लठभरवा भोज' कहलाता है। विधवा विवाह की भी अनुमति है।
- त्योहार व शोक पर्व: थारू जनजाति दीपावली को शोक पर्व (Sorrow Festival) के रूप में मनाती है (इस दिन ये अपने पूर्वजों को भेंट/रोटी अर्पित करते हैं जिसे 'भेटिया' कहते हैं)। ये बजहर नामक त्योहार वैशाख/ज्येष्ठ में मनाते हैं। होली पर ये 8 दिनों तक फाग गाते हुए 'खिचड़ी नृत्य' करते हैं।
- धर्म व खान-पान: ये हिंदू धर्म के देवी-देवताओं और प्रकृति पूजक (नारायण, खड़ग भूत, भूमिया) हैं। इनका मुख्य भोजन चावल है। ये चावल से निर्मित देशी मदिरा का सेवन करते हैं, जिसे 'जाड़' कहा जाता है।
- शैक्षणिक उत्थान: थारू जनजाति के बच्चों को शिक्षित करने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा लखीमपुर खीरी में एक महाविद्यालय स्थापित किया गया है।
- बुक्सा या भोक्सा जनजाति (Buksa Tribe):
- निवास क्षेत्र: मुख्य रूप से बिजनौर जिले के छोटी बस्तियों में (कुछ आबादी पौड़ी गढ़वाल व तराई में)।
- उत्पत्ति एवं गोत्र: ये स्वयं को चित्तौड़गढ़ के पटवार राजपूत घराने का वंशज मानते हैं।
- सामाजिक विभाजन: बुक्सा समाज चार वर्णों में बंटा हुआ है—बुक्सा ब्राह्मण, बुक्सा क्षत्रिय, बुक्सा अहिर और बुक्सा नाई। इनमें बुक्सा क्षत्रिय का स्थान सर्वोच्च है।
- न्याय व्यवस्था: बुक्सा जनजाति में विवाद निपटाने हेतु एक त्रि-स्तरीय पंचायत होती है। पंचायत का सर्वोच्च अधिकारी 'तखत' कहलाता है। मुंसिफ, दरोगा और सिपाही अन्य पद होते हैं।
- धर्म व आराध्य: ये चामुंडा देवी की अनन्य पूजा करते हैं। इसके अतिरिक्त काशीपुर की बाला सुंदरी देवी इनकी कुलदेवी मानी जाती हैं।
- विकास परियोजना: बुक्सा जनजाति विकास परियोजना 1983-84 में प्रारंभ की गई थी।
- जौनसारी जनजाति (Jaunsari Tribe):
- पृष्ठभूमि: मूलतः उत्तराखंड के देहरादून-चकराता क्षेत्र की जनजाति है, किंतु उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी कुछ समूह पाए जाते हैं।
- विशिष्ट सामाजिक रीति-रिवाज: इनमें प्राचीन काल से बहुपति विवाह प्रथा (Polyandry) प्रचलित रही है (स्वयं को पांडवों का वंशज मानते हैं)।
- उत्सव एवं नृत्य: जागड़ा (महासू देवता का पर्व), माघ मेला, बिस्सू (बैसाखी)। इनके प्रमुख लोकनृत्य हारुल, रासो, घुमसू और तांदी हैं।
- गोंड जनजाति समूह (Gond Tribe Group):
- निवास जिले: महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर एवं सोनभद्र।
- उप-जातियां: धुरिया, नायक, ओझा, पठारी, राजगोंड आदि।
- पेशा व संस्कृति: कृषि, वनोपज संग्रह व पशुपालन। इनमें बूढ़ादेव, दूल्हादेव एवं बड़ादेव की पूजा मुख्य रूप से की जाती है।
- सहरिया जनजाति (Sahariya Tribe):
- एकमात्र मुख्य जिला: उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में निवास करती है (परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला प्रश्न)।
- पेशा एवं जीवन: वनों से लकड़ी, शहद, गोंद और औषधीय जड़ी-बूटी एकत्र करना तथा खेतिहर मजदूरी।
- बैगा जनजाति (Baiga Tribe):
- निवास जिला: मुख्य रूप से सोनभद्र जिला।
- पहचान व परंपरा: ये पारंपरिक रूप से ओझा, वैद्य, तांत्रिक और वन रक्षक माने जाते हैं। गोंड जनजाति इन्हें अपना पुरोहित मानती है।
- चेरो एवं खरवार जनजाति (Chero & Kharwar Tribe):
- चेरो: सोनभद्र और वाराणसी जिलों में निवास। ये प्राचीन काल में राजा चेरो के वंशज माने जाते हैं।
- खरवार (खैरवार): सोनभद्र, मिर्जापुर, देवरिया, बलिया व गाजीपुर। खैर के वृक्षों से पारंपरिक रूप से कत्था बनाने के कारण इनका नाम 'खरवार' पड़ा। इनका स्वभाव अत्यंत क्रोधी और स्वाभिमानी माना जाता है।
3. उत्तर प्रदेश की जनजातियों की जिलावार स्थिति (District-Wise Master Table)
| जनजाति का नाम | निवास जिले (उत्तर प्रदेश) | विशिष्ट सामाजिक परंपराएं / परीक्षा बिंदु |
|---|---|---|
| थारू | लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, महाराजगंज (तराई पट्टी) | दीपावली को शोक पर्व के रूप में मनाना, बजहर त्योहार, लठभरवा भोज, जाड़ (मदिरा)। |
| बुक्सा (भोक्सा) | बिजनौर (मुख्यतः) | पटवार राजपूत वंशज, चामुंडा देवी की पूजा, पंचायत का सर्वोच्च अधिकारी 'तखत'। |
| सहरिया | ललितपुर | बुंदेलखंड के वनों पर निर्भर अत्यंत निर्धन जनजाति समूह। |
| बैगा | सोनभद्र | गोंडों के पुरोहित/तांत्रिक, जड़ी-बूटियों के विशेषज्ञ वैद्य। |
| पहरिया | सोनभद्र | पहाड़ियों व वनों के ढलानों पर रहने वाली लघु जनजाति। |
| अगरिया | सोनभद्र | पारंपरिक रूप से लौह अयस्क को पिघलाकर औजार बनाने वाले लोहार समुदाय। |
| पटारी | सोनभद्र | गोंड समुदाय की वंशावली लिखने और धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले। |
| पंखा / पनिका | सोनभद्र एवं मिर्जापुर | कबीरपंथी विचारधारा को मानने वाले बुनकर जनजाति समूह। |
| खरवार | सोनभद्र, मिर्जापुर, बलिया, गाजीपुर, देवरिया | खैर वृक्ष से कत्था निर्माण, करमा नृत्य के कुशल नर्तक। |
| चेरो | सोनभद्र, वाराणसी, चंदौली | जंगल कटाई व कृषि मजदूरी में संलग्न। |
- दीपावली को शोक पर्व: थारू जनजाति द्वारा मनाया जाता है।
- सहरिया जनजाति का एकमात्र जिला: ललितपुर (बुंदेलखंड)।
- सर्वाधिक जनजातियों वाला जिला: सोनभद्र (यहाँ बैगा, अगरिया, पहरिया, पटारी, पंखा, खरवार सब पाए जाते हैं)।
- बुक्सा जनजाति की न्याय पंचायत: सर्वोच्च अधिकारी 'तखत' कहलाता है (जिला: बिजनौर)।
- शून्य जनजाति जिले: 2011 जनगणना के अनुसार अयोध्या एवं जालौन में कोई एसटी नहीं है।
परीक्षा में बार-बार पूछे गए अभ्यास प्रश्न (PYQ Practice Set)
प्र. 1. निम्नलिखित में से कौन सी जनजाति दीपावली को 'शोक पर्व' के रूप में मनाती है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 2. उत्तर प्रदेश के किस जनपद में 'सहरिया जनजाति' मुख्य रूप से निवास करती है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 3. उत्तर प्रदेश में 'बुक्सा' (भोक्सा) जनजाति का मुख्य निवास क्षेत्र कौन सा जिला है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 4. जनगणना 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश के किस जिले में अनुसूचित जनजातियों (ST) की जनसंख्या सर्वाधिक दर्ज की गई है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 5. 'बजहर' नामक पारंपरिक त्योहार तथा 'लठभरवा भोज' विवाह प्रथा किस जनजाति से संबंधित है?
उत्तर एवं व्याख्या
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