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UP GK Notes: उत्तर प्रदेश के प्रमुख मेले एवं उत्सव | Fairs & Festivals of UP | Complete List

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UP GK Notes: उत्तर प्रदेश के प्रमुख मेले एवं उत्सव | Fairs & Festivals of UP | Complete List

उत्तर प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और धार्मिक समरसता के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 2,250 से अधिक मेले आयोजित किए जाते हैं। इनमें प्रयागराज का महाकुंभ व माघ मेला, आगरा का बटेश्वर पशु मेला, मेरठ का हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक नौचंदी मेला, बाराबंकी का देवा शरीफ मेला और गोरखपुर का खिचड़ी मेला परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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1. उत्तर प्रदेश के मेलों से संबंधित सांख्यिकी एवं प्रमुख तथ्य

  • सर्वाधिक मेले आयोजित होने वाला जिला: मथुरा (86 मेले)। इसके पश्चात कानपुर (80 मेले), हमीरपुर (79 मेले) और झांसी (78 मेले) का स्थान आता है।
  • सबसे कम मेले आयोजित होने वाला जिला: पीलीभीत (यहाँ सबसे कम मेलों का आयोजन होता है)।
  • महाकुंभ मेला (प्रयागराज): प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन त्रिवेणी संगम पर आयोजित होता है। यह विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक जन-समागम है, जिसे 2017 में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' (Intangible Cultural Heritage) घोषित किया गया।
  • कुंभ / अर्धकुंभ मेला: प्रत्येक 6 वर्ष पर प्रयागराज में आयोजित होता है।
  • माघ मेला: प्रयागराज संगम तट पर प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति से लेकर माघ पूर्णिमा तक प्रतिवर्ष कल्पवासियों के लिए आयोजित होता है।

2. उत्तर प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक मेले (Complete District-Wise List)

मेले का नाम स्थान / जिला आयोजन समय विशिष्ट ऐतिहासिक एवं परीक्षा तथ्य
बटेश्वर मेला (पशु मेला) बटेश्वर (आगरा) कार्तिक शुक्ल द्वितीया यमुना तट पर स्थित 101 शिव मंदिरों का क्षेत्र; उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा ऊंट व पशु मेला (पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पैतृक भूमि)।
नौचंदी मेला मेरठ होली के बाद (चैत्र माह) सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक; यहाँ नवचंडी देवी का मंदिर और बाले मियां की दरगाह दोनों एक साथ स्थित हैं।
देवा शरीफ मेला बाराबंकी कार्तिक माह प्रसिद्ध सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मजार पर वार्षिक उर्स के अवसर पर आयोजित होता है।
खिचड़ी मेला गोरखपुर मकर संक्रांति (14 जनवरी) गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की सदियों पुरानी परंपरा का एक माह चलने वाला मेला।
शाकंभरी देवी मेला सहारनपुर नवरात्र (चैत्र व अश्विन) शिवालिक की पहाड़ियों में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ पर विशाल मेले का आयोजन होता है।
ददरी मेला (पशु मेला) बलिया कार्तिक पूर्णिमा महर्षि भृगु के शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर; सोनपुर के बाद पूर्वी भारत का दूसरा सबसे बड़ा मवेशी/पशु मेला।
सैयद सालार मेला बहराइच जेठ माह (मई-जून) गाजी सैयद सालार मसूद की दरगाह पर आयोजित ऐतिहासिक उर्स मेला।
गोविंद साहब मेला अंबेडकर नगर (अतरौलिया) अगहन मार्गशीर्ष संत गोविंद साहब की तपोस्थली पर पशुओं एवं हस्तशिल्प का प्रसिद्ध मेला।
कैलाश मेला आगरा (सिकंदरा) श्रावण मास का तीसरा सोमवार यमुना नदी के किनारे स्थित कैलाश मंदिर में भगवान शिव की आराधना का विशाल मेला।
ढाई घाट मेला शाहजहांपुर कार्तिक पूर्णिमा गंगा तट पर लगने वाला रुहेलखंड क्षेत्र का अत्यंत प्रसिद्ध पारंपरिक स्नान मेला।
तिगरी मेला अमरोहा कार्तिक पूर्णिमा गंगा तट पर लाखों श्रद्धालुओं का पवित्र गंगा स्नान मेला।
कलिंजर मेला बांदा कार्तिक पूर्णिमा कालिंजर दुर्ग के ऐतिहासिक नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित होता है।
देवी पाटन मेला बलरामपुर (तुलसीपुर) चैत्र नवरात्र 51 शक्तिपीठों में से एक पाटेश्वरी देवी मंदिर परिसर में आयोजित; भारत व नेपाल के श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।
मकनपुर मेला कानपुर नगर (बिल्हौर) माघ माह सूफी संत शाह मदार की दरगाह पर आयोजित; ऊंट, घोड़े व पशुओं का बड़ा व्यापारिक केंद्र।
गोला गोकर्णनाथ मेला लखीमपुर खीरी चैत्र माह (महाशिवरात्रि) 'छोटी काशी' कहे जाने वाले शिव मंदिर में विशाल कांवड़ व स्नान मेला।

3. ब्रज एवं मथुरा मंडल के प्रसिद्ध मेले एवं परिक्रमा

  • लठमार होली (बरसाना व नंदगांव): फाल्गुन शुक्ल नवमी को बरसाना में राधा रानी मंदिर के प्रांगण में महिलाओं द्वारा पुरुषों पर लाठियों से प्रेमपूर्वक प्रहार कर खेली जाने वाली विश्वप्रसिद्ध होली।
  • हरिदास जयंती मेला (वृंदावन): स्वामी हरिदास (तानसेन के गुरु) की स्मृति में निधिवन, वृंदावन में शास्त्रीय संगीत का भव्य आयोजन।
  • मुड़िया पूनों मेला (गोवर्धन, मथुरा): आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के अवसर पर गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा का विशाल मेला (सनातन गोस्वामी की स्मृति में)।
  • झूला मेला: मथुरा, वृंदावन एवं अयोध्या में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में भगवान श्री कृष्ण व श्री राम के हिंडोला उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
  • कंस वध मेला: हमीरपुर एवं फतेहपुर सीकरी में कंस वध के प्रतीक रूप में आयोजित होता है।

4. उत्तर प्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक महोत्सव (State Cultural Festivals)

महोत्सव का नाम आयोजन स्थल (जिला) महत्व एवं सांस्कृतिक स्वरूप
सुलहकुल उत्सव आगरा अकबर द्वारा प्रतिपादित 'सुलह-ए-कुल' की नीति पर आधारित हिंदू-मुस्लिम एकता का उत्सव।
ताज महोत्सव आगरा (शिल्पग्राम) प्रत्येक वर्ष फरवरी (18 से 27 फरवरी) में भारतीय हस्तशिल्प, नृत्य और मुगलकालीन संस्कृति का प्रदर्शन।
कबीर उत्सव / मगहर महोत्सव मगहर (संत कबीर नगर) संत कबीर की स्मृति एवं निर्गुण दर्शन के प्रचार हेतु आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम।
गंगा महोत्सव / देव दीपावली वाराणसी कार्तिक पूर्णिमा पर वाराणसी के 84 घाटों पर लाखों दीयों का प्रज्वलन व शास्त्रीय संगीत संध्या।
कजरी महोत्सव मिर्जापुर वर्षा ऋतु में लोकगायकी की प्रसिद्ध शैली 'कजरी' का राज्यस्तरीय उत्सव।
आयुर्वेद महोत्सव झांसी बुंदेलखंड की जड़ी-बूटियों एवं प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने हेतु।
सैफई महोत्सव इटावा (सैफई) प्रतिवर्ष दिसंबर-जनवरी में आयोजित होने वाला विशाल ग्रामीण एवं सांस्कृतिक महोत्सव।
🎯 परीक्षा में सीधे पूछे जाने वाले 5 निर्णायक फैक्ट्स:
  • सर्वाधिक व न्यूनतम मेले: सर्वाधिक मेले मथुरा (86) में और सबसे कम मेले पीलीभीत में लगते हैं।
  • हिंदू-मुस्लिम एकता के दो प्रमुख मेले: मेरठ का नौचंदी मेला तथा आगरा का सुलहकुल उत्सव।
  • उत्तर प्रदेश के दो बड़े पशु मेले: आगरा का बटेश्वर मेला (ऊंट मेला) तथा बलिया का ददरी मेला।
  • वारिस अली शाह की दरगाह: बाराबंकी के देवा शरीफ में कार्तिक माह में वार्षिक मेला आयोजित होता है।
  • शाकंभरी देवी शक्तिपीठ: सहारनपुर में नवरात्र के समय विशाल मेला भरता है।

परीक्षा में बार-बार पूछे गए अभ्यास प्रश्न (PYQ Practice Set)

प्र. 1. हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक प्रसिद्ध 'नौचंदी मेला' उत्तर प्रदेश के किस जनपद में प्रतिवर्ष लगता है?

(a) आगरा    (b) अलीगढ़    (c) मेरठ    (d) सहारनपुर
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (c) मेरठ
मेरठ में होली के पश्चात चैत्र मास में नौचंदी मेला लगता है। यहाँ नवचंडी देवी का मंदिर और बाले मियां की मजार दोनों स्थित हैं, जो कौमी एकता का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

प्र. 2. उत्तर प्रदेश में प्रसिद्ध 'बटेश्वर पशु मेला' किस जिले में आयोजित किया जाता है?

(a) मथुरा    (b) आगरा    (c) कानपुर    (d) इटावा
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (b) आगरा
आगरा के बटेश्वर में यमुना तट पर कार्तिक मास में यह मेला आयोजित होता है। यह विशेष रूप से ऊंटों एवं पशुओं के क्रय-विक्रय हेतु उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पशु मेला है।

प्र. 3. सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की पवित्र मजार पर वार्षिक मेले का आयोजन उत्तर प्रदेश के किस स्थान पर होता है?

(a) देवा शरीफ (बाराबंकी)    (b) बहराइच    (c) फतेहपुर सीकरी    (d) कड़ा मानिकपुर
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (a) देवा शरीफ (बाराबंकी)
बाराबंकी जिले से लगभग 12 किमी दूर देवा शरीफ में कार्तिक माह में सूफी संत हाजी वारिस अली शाह के उर्स पर प्रसिद्ध मेला लगता है।

प्र. 4. प्रसिद्ध ददरी पशु मेला महर्षि भृगु के शिष्य दर्दर मुनि की स्मृति में उत्तर प्रदेश के किस जनपद में लगता है?

(a) गाजीपुर    (b) बलिया    (c) आजमगढ़    (d) गोरखपुर
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (b) बलिया
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बलिया जिले में ऐतिहासिक ददरी मेला लगता है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा मवेशी एवं व्यापारिक मेला है।

प्र. 5. उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष सर्वाधिक मेलों का आयोजन निम्नलिखित में से किस जिले में होता है?

(a) प्रयागराज    (b) वाराणसी    (c) मथुरा    (d) कानपुर
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (c) मथुरा
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 86 मेले मथुरा जिले में आयोजित होते हैं। इसके पश्चात कानपुर (80) तथा हमीरपुर (79) का स्थान है, जबकि सबसे कम मेले पीलीभीत में लगते हैं।
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