UP GK Notes: उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोकगीत | Folk Songs of UP | Regional Folk Music & Traditions
उत्तर प्रदेश की लोक-संस्कृति में लोकगीत जनमानस की भावनाओं, ऋतु-चक्र, संस्कारों एवं वीर गाथाओं के संवाहक रहे हैं। राज्य के चारों प्रमुख सांस्कृतिक क्षेत्रों—पूर्वांचल (भोजपुरी क्षेत्र), ब्रज क्षेत्र, बुंदेलखंड एवं अवध की अपनी विशिष्ट गायन परंपराएं हैं। मिर्जापुर की वर्षाकालीन कजरी, पूर्वांचल का जनगाथापरक बिरहा, ब्रज का भक्तिमय रसिया, बुंदेलखंड का वीर रस से ओत-प्रोत आल्हा तथा पुत्र जन्मोत्सव का सोहर प्रतियोगी परीक्षाओं के सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हैं।
1. उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोकगीत एवं उनकी विशेषताएं (Core Folk Songs)
- कजरी (Kajari):
- उत्पत्ति एवं मुख्य केंद्र: मिर्जापुर (विंध्य क्षेत्र)। इसके अलावा यह वाराणसी, प्रयागराज और चंदौली में भी गाई जाती है।
- ऋतु एवं प्रसंग: वर्षा ऋतु (सावन-भादों) का अत्यंत लोकप्रिय लोकगीत है, जो विरह-वेदना, राधा-कृष्ण प्रेम तथा प्रकृति सौंदर्य पर आधारित होता है।
- प्रमुख घराना/शैली: मिर्जापुर में कजरी के चार अखाड़े (पंडित जी का अखाड़ा, जहांगीर अखाड़ा, भैरो अखाड़ा व राम अखाड़ा) प्रसिद्ध हैं।
- बिरहा (Birha):
- क्षेत्र: पूर्वांचल (पूर्वी उत्तर प्रदेश) एवं बिहार से सटा क्षेत्र।
- स्वरूप: यह मुख्य रूप से अहीर (यादव) समुदाय का अत्यंत लोकप्रिय लोकगीत है, जो ऐतिहासिक घटनाओं, लोक-गाथाओं, पौराणिक आख्यानों और समसामयिक विषयों पर आधारित होता है।
- विशेषता: इसे बिना किसी वाद्य यंत्र के भी आलाप लेकर गाया जा सकता है, यद्यपि करताल और ढोलक इसके मुख्य वाद्य हैं।
- रसिया (Rasiya):
- क्षेत्र: ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, हाथरस, आगरा)।
- स्वरूप: भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के अलौकिक प्रेम, रासलीला एवं गोपियों की नोकझोंक पर आधारित भक्ति व श्रृंगार रस प्रधान गायन।
- अवसर: फाल्गुन (होली) के महीने में 'बम्ब' (विशाल नगाड़ा) बजाकर रसिया विशेष रूप से गाया जाता है।
- आल्हा (Alha):
- क्षेत्र: बुंदेलखंड (महोबा, बांदा, हमीरपुर, झांसी) तथा अवध के कुछ भाग (बैसवाड़ा)।
- स्वरूप: यह विशुद्ध वीर रस (Heroic Folk Ballad) का लोकगीत है। जगनिक द्वारा रचित 'परमाल रासो' के आल्हा-खंड पर आधारित, जिसमें महोबा के वीर योद्धा आल्हा और ऊदल के 52 युद्धों का ओजस्वी वर्णन है।
- गायन ऋतु: वर्षा ऋतु में ढोलक और मंजीरे की तेज थाप पर आल्हा गाया जाता है।
- सोहर (Sohar):
- क्षेत्र: संपूर्ण पूर्वांचल एवं अवध क्षेत्र।
- अवसर: घर में संतान (विशेषकर पुत्र) जन्म तथा जन्मोत्सव (छठी, बरही) के शुभ मांगलिक अवसर पर महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला संस्कार गीत। इसमें कौशल्या-राम एवं यशोदा-कृष्ण के प्रसंग वर्णित होते हैं।
- फाग / होरी (Phag / Hori):
- क्षेत्र: बुंदेलखंड एवं ब्रज क्षेत्र।
- अवसर: वसंत पंचमी से लेकर रंगपंचमी तक फाल्गुन माह में सामूहिक रूप से ढोलक, मजीरा व झांझ के साथ गाया जाने वाला उल्लासमय गीत। ईसुरी की फागें बुंदेलखंड में अमर हैं।
2. उत्तर प्रदेश के लोकगीतों का क्षेत्रवार वर्गीकरण (Regional Matrix)
परीक्षा में अक्सर लोकगीत का नाम देकर उसके संबंधित क्षेत्र अथवा शैली के जोड़े (सुमेलित करने हेतु) पूछे जाते हैं:
| सांस्कृतिक क्षेत्र | संबंधित प्रमुख जनपद | प्रमुख प्रचलित लोकगीत | प्रमुख रस / अवसर |
|---|---|---|---|
| पूर्वांचल (भोजपुरी क्षेत्र) | वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, आजमगढ़ | बिरहा, कजरी, सोहर, झूमर, चैती, कव्वाली, पचरा, कहरवा, नकटा | वर्षा ऋतु, संस्कार गीत (संतान जन्म/विवाह), विरह व लोकगाथा। |
| ब्रज क्षेत्र | मथुरा, वृंदावन, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, फिरोजाबाद | रसिया, होरी, चरकुला गीत, ढोला, मल्हार, झूला गीत | श्रृंगार रस, भक्ति भाव, राधा-कृष्ण प्रेम एवं होली उत्सव। |
| बुंदेलखंड | झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट | आल्हा, ईसुरी फाग, हरदौल की मनौती, दिवारी, लमटेरा (भोला गीत) | वीर रस (योद्धा गाथा), होली गायन, विपत्ति निवारण मन्नत। |
| अवध क्षेत्र | लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रतापगढ़, बाराबंकी, सुल्तानपुर, गोंडा | सोहर, कव्वाली, बधाई गीत, नकटा, दादरा, कजरी | मांगलिक संस्कार (विवाह व जन्मोत्सव), सूफी भक्ति व शास्त्रीय स्पर्श। |
| पश्चिमी उत्तर प्रदेश (रुहेलखंड/कौरवी) | मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, बरेली, बदायूं | ढोला, रागिनी, पूरन भगत, मल्हार | राजा नल-दमयंती गाथा (ढोला), सामाजिक आख्यान व सांगीत गायन। |
3. अन्य महत्वपूर्ण लोकगीत शैलियां एवं परीक्षा उपयोगी बिंदु
- चैती / चैता (Chaiti): पूर्वांचल में चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) में गाया जाने वाला अर्ध-शास्त्रीय लोकगीत। इसमें प्रायः प्रेम, विरह तथा 'अरे रामा' का टेक बार-बार प्रयुक्त होता है।
- ढोला (Dhola): पश्चिमी उत्तर प्रदेश (विशेषकर आगरा, मेरठ, अलीगढ़) का अत्यंत लोकप्रिय गाथा गीत। इसमें राजा नल और दमयंती के प्रेम एवं संघर्ष की कथा का वर्णन होता है।
- हरदौल की मनौती: बुंदेलखंड में ओरछा के वीर राजकुमार हरदौल की स्मृति में गाया जाने वाला लोकगीत। विवाह आदि शुभ अवसरों पर बहन-बेटियां विपत्ति निवारण हेतु हरदौल को न्योता देती हैं।
- रागिनी (Ragini): पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा सीमावर्ती जिलों (शामली, बागपत, मेरठ) में आख्यानों और किस्सों को संगीतमय रूप में सुनाने की लोकप्रिय शैली।
- ईसुरी की फाग: बुंदेलखंड के लोककवि ईसुरी द्वारा रचित फागें चतुष्पदी छंद में गाई जाती हैं, जो ग्रामीण यथार्थ और श्रृंगार का अनूठा मेल हैं।
- कजरी की उत्पत्ति: मिर्जापुर (वर्षा ऋतु / सावन मास का प्रमुख लोकगीत)।
- वीर रस प्रधान आल्हा: बुंदेलखंड (महोबा) के वीर आल्हा-ऊदल के 52 युद्धों का गायन।
- रसिया का संबंध: ब्रजभूमि (मथुरा-वृंदावन) से, जहां होली पर बम्ब नगाड़े के साथ इसका गायन होता है।
- बिरहा लोकगाथा: पूर्वांचल (अहीर/यादव समुदाय द्वारा गाए जाने वाला प्रमुख लोकगीत)।
- संस्कार गीत सोहर: अवध एवं पूर्वांचल में संतान (पुत्र) के जन्म पर गाया जाता है।
परीक्षा में बार-बार पूछे गए अभ्यास प्रश्न (PYQ Practice Set)
प्र. 1. उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध वर्षाकालीन लोकगीत 'कजरी' का मुख्य उद्गम स्थल निम्नलिखित में से कौन सा माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 2. बुंदेलखंड क्षेत्र का सुप्रसिद्ध वीर रस प्रधान लोकगीत 'आल्हा' मुख्य रूप से किस महाकाव्य/ग्रंथ पर आधारित है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 3. निम्नलिखित में से कौन सा लोकगीत उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र से संबंधित है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 4. अवध एवं पूर्वांचल क्षेत्र में संतान (पुत्र) के जन्मोत्सव के अवसर पर गाया जाने वाला पारंपरिक संस्कार गीत कौन सा है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 5. राजा नल और दमयंती के आख्यान पर आधारित प्रसिद्ध लोकगीत 'ढोला' उत्तर प्रदेश के किस अंचल में सर्वाधिक लोकप्रिय है?
उत्तर एवं व्याख्या
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