UP GK Notes: उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोकनृत्य एवं लोकनाट्य | Folk Dances & Theatres of UP | Complete List
उत्तर प्रदेश की लोक-संस्कृति और कलात्मक विरासत में लोकनृत्य एवं लोकनाट्य का स्थान अद्वितीय है। राज्य में शास्त्रीय नृत्य कथक (Kathak) की समृद्ध परंपरा के साथ-साथ ब्रज का विश्वप्रसिद्ध चरकुला नृत्य, बुंदेलखंड का अहीर समुदाय द्वारा किया जाने वाला पाई-डंडा व ख्याल, पूर्वांचल का धोबिया व नटवरी, मिर्जापुर-सोनभद्र का जनजातीय करमा नृत्य तथा जन-मनोरंजन का मुख्य माध्यम नौटंकी व रासलीला अत्यंत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं।
1. उत्तर प्रदेश का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य: कथक (Kathak)
- शास्त्रीय दर्जा: उत्तर प्रदेश का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance) कथक है। 'कथक' शब्द की उत्पत्ति 'कथा' से हुई है (कथा कहे सो कथक कहावे)।
- लखनऊ घराना एवं नवाब वाजिद अली शाह: अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह के संरक्षण में कथक का स्वर्ण युग प्रारंभ हुआ। वे स्वयं 'अख्तरपिया' उपनाम से ठुमरी व बंदिशें रचते थे और कथक करते थे।
- प्रमुख प्रतिपादक (Artists): ठाकुर प्रसाद, पंडित बिंदादीन महाराज, कालका प्रसाद, अच्छन महाराज, लच्छू महाराज, पंडित बिरजू महाराज (पद्म विभूषण) एवं शंभू महाराज।
- राष्ट्रीय कथक संस्थान: उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अंतर्गत लखनऊ में स्थित है।
2. उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोकनाट्य (Folk Theatres of UP)
- नौटंकी (Nautanki):
- उत्पत्ति एवं शैली: उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक लोकप्रिय संगीत-नाट्य रूप। इसकी दो प्रमुख शैलियां/घराने हैं: हाथरस शैली (भक्ति रस एवं शास्त्रीय गायन प्रधान) तथा कानपुर शैली (मनोरंजन, हास्य एवं संवाद प्रधान)।
- मुख्य वाद्य: नगाड़ा, ढोलक, शहनाई और हारमोनियम। प्रसिद्ध रूपक: सत्य हरिश्चंद्र, अमर सिंह राठौर, लैला मजनू।
- रासलीला (Raslila):
- क्षेत्र: ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन)।
- विषयवस्तु: भगवान श्री कृष्ण के बाल्यकाल, माखन चोरी, गोपी-प्रेम और महारास पर आधारित गीतात्मक व नृत्य-नाट्य मंचन। इसके प्रवर्तक स्वामी घमंडदेव माने जाते हैं।
- रामलीला (Ramlila):
- स्वरूप: गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस की चौपाइयों पर आधारित भगवान राम के जीवन का मंचन। प्रयागराज, वाराणसी एवं अयोध्या की रामलीला विश्वप्रसिद्ध है। रामनगर (वाराणसी) की रामलीला बिना किसी आधुनिक माइक/लाइट के खुले रंगमंच पर खेली जाती है (यूनेस्को अमूर्त धरोहर)।
3. उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोकनृत्य: क्षेत्रवार वर्गीकरण (Regional Folk Dances)
| लोकनृत्य | संबंधित क्षेत्र | समुदाय / अवसर | कलात्मक स्वरूप एवं परीक्षा उपयोगी तथ्य |
|---|---|---|---|
| चरकुला नृत्य | ब्रज क्षेत्र | महिला नर्तक (राधाष्टमी/होली) | सिर पर 108 जलते हुए दीपकों का बहुमंजिला पिंजरा (चरकुला) रखकर रथ के पहिए पर संतुलन बनाते हुए किया जाने वाला अद्भुत घड़ा नृत्य। |
| पाई-डंडा (मोनिया) | बुंदेलखंड | अहीर (यादव) समाज | गुजरात के डांडिया नृत्य के समान; दीपावली पर लाठी-डंडों की परस्पर चोट और पैंतरों के साथ ओजस्वी मार्शल डांस। |
| धोबिया नृत्य | पूर्वांचल | धोबी समाज (मांगलिक अवसर) | धोबी और गधे के आत्मीय व हास्यपूर्ण संबंधों को प्रदर्शित करने वाला तीव्र पद-संचालन युक्त लोकप्रिय नृत्य। |
| ख्याल नृत्य | बुंदेलखंड | संतान जन्मोत्सव | पुत्र जन्म के अवसर पर रंगीन कागजों और बांस की बनी मंदिरनुमा टटिया (महल) को सिर पर रखकर किया जाने वाला उल्लास नृत्य। |
| करमा व शीला नृत्य | सोनभद्र एवं मिर्जापुर | खरवार, कोल, बैगा जनजाति | कर्म देवता को प्रसन्न करने एवं अच्छी फसल हेतु स्त्री-पुरुषों द्वारा आमने-सामने पंक्तिबद्ध होकर मांदर व झांझ पर किया जाने वाला जनजातीय नृत्य। |
| दीवारी / दिवारी नृत्य | बुंदेलखंड | दीपावली के अवसर पर | मोरपंख बांधकर ढोलक की तीव्र गति पर लाठी-डंडों से कलाबाजी और शौर्य का प्रदर्शन। |
| नटवरी नृत्य | पूर्वांचल | अहीर (यादव) समुदाय | भगवान श्री कृष्ण (नटवर) के गोवर्धन पर्वत धारण व कालिया दमन प्रसंगों को पैरों की थाप और नगाड़े की गति पर प्रस्तुत किया जाता है। |
| राहुला / सैरा नृत्य | बुंदेलखंड | वर्षा ऋतु / फसल कटाई | सैरा (शौरा): फसलों की कटाई के समय युवक-युवतियां डंडे लेकर नृत्य करते हैं। राहुला: हास्य-व्यंग्य और नीतिपरक कहावतों का नृत्य-नाट्य। |
| घड़ा व मयूर नृत्य | ब्रज क्षेत्र | राधा-कृष्ण भक्ति प्रसंग | मयूर नृत्य: नर्तक मोरपंखों के वस्त्र पहनकर मोर की तरह नृत्य करते हैं। घड़ा नृत्य: सिर पर पीतल के घड़े रखकर तालबद्ध संतुलन साधना। |
| जोगिनी नृत्य | अवध क्षेत्र | रामनवमी पर्व | पुरुष नर्तकों द्वारा स्त्री वेश (जोगिनी रूप) धारण करके साधु-संतों के सम्मुख राम जन्म की बधाई पर भक्ति नृत्य किया जाता है। |
- 108 दीपकों का चरकुला: ब्रज क्षेत्र का महिला संतुलन नृत्य।
- बुंदेलखंड का डांडिया: पाई-डंडा (अहीर समाज द्वारा लाठी-डंडों से खेला जाने वाला नृत्य)।
- करमा जनजातीय नृत्य: सोनभद्र एवं मिर्जापुर के खरवार/कोल आदिवासियों द्वारा किया जाता है।
- नौटंकी के दो प्रमुख घराने: हाथरस (शास्त्रीय/गायन शैली) एवं कानपुर (नाट्य/अभिनय शैली)।
- एकमात्र शास्त्रीय नृत्य: कथक, जिसका संवर्धन लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के दरबार में हुआ।
परीक्षा में बार-बार पूछे गए अभ्यास प्रश्न (PYQ Practice Set)
प्र. 1. सिर पर 108 जलते हुए दीपकों का पिंजरा रखकर किया जाने वाला प्रसिद्ध 'चरकुला नृत्य' उत्तर प्रदेश के किस सांस्कृतिक क्षेत्र से संबंधित है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 2. बुंदेलखंड क्षेत्र में अहीर समुदाय द्वारा गुजरात के डांडिया के समान खेला जाने वाला पारंपरिक नृत्य कौन सा है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 3. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र एवं मिर्जापुर जनपदों में खरवार जनजाति द्वारा किया जाने वाला प्रसिद्ध लोकनृत्य कौन सा है?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 4. उत्तर प्रदेश के किस लोकनाट्य के दो प्रमुख घराने/शैलियां 'हाथरस' और 'कानपुर' के नाम से जानी जाती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या
प्र. 5. अवध के किस नवाब के संरक्षण काल को उत्तर प्रदेश के एकमात्र शास्त्रीय नृत्य 'कथक' का स्वर्णकाल माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या
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