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UP GK Notes: उत्तर प्रदेश के प्रमुख संगीत घराने एवं संबंधित कलाकार | Music Gharanas of UP

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UP GK Notes: उत्तर प्रदेश के प्रमुख संगीत घराने एवं संबंधित कलाकार | Music Gharanas of UP

उत्तर प्रदेश भारतीय शास्त्रीय संगीत (हिंदुस्तानी संगीत) का केंद्रीय गढ़ रहा है। मध्यकाल और उत्तर-मुगल काल में जब राजदरबारों और मंदिर परंपराओं ने संगीत को संरक्षण दिया, तब विशिष्ट गायन, वादन एवं नृत्य शैलियों के रूप में 'संगीत घरानों' (Music Gharanas) का उदय हुआ। अवध की नफासत और नजाकत से युक्त लखनऊ घराना, आध्यात्मिक एवं ठुमरी-टप्पा का केंद्र बनारस घराना, ख्याल गायकी की बारीक तानों वाला किराना घराना तथा द्रुपद-धमार प्रधान अतरौली घराना प्रतियोगी परीक्षाओं के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल हैं।

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1. लखनऊ घराना (Lucknow Gharana)

  • संरक्षण एवं पृष्ठभूमि: अवध के नवाबों (विशेषकर नवाब वाजिद अली शाह एवं आसफ़उद्दौला) के काल में इसका चरमोत्कर्ष हुआ। वाजिद अली शाह स्वयं 'अख्तरपिया' उपनाम से ठुमरी बंदिशें लिखते थे।
  • विशेषता: यह घराना मुख्य रूप से कथक नृत्य, तबला वादन एवं ठुमरी-दादरा गायकी के लिए विख्यात है।
  • कथक नृत्य के कलाकार: ठाकुर प्रसाद, पंडित कालका प्रसाद, बिंदादीन महाराज, अच्छन महाराज, लच्छू महाराज, शंभू महाराज और पंडित बिरजू महाराज (पद्म विभूषण)।
  • तबला वादन: लखनऊ तबला घराने के प्रवर्तक मियां मोदू खां और बख्शू खां माने जाते हैं। यहाँ तबले के खुले बोल और ताल की नजाकत प्रधान होती है।
  • ठुमरी व गजल: बेगम अख्तर (मल्लिका-ए-गजल), सादिक अली खां।

2. बनारस घराना (Banaras Gharana)

  • पृष्ठभूमि: काशी की शिव-भक्ति और गंगा तट की आध्यात्मिक परंपरा में विकसित घराना। यह गायन, वादन (तबला, शहनाई, सितार, सारंगी) और कथक तीनों में सिद्धहस्त है।
  • तबला वादन के प्रवर्तक व उस्ताद: पंडित राम सहाय ने बनारस तबला घराने की नींव रखी। प्रमुख वादक: पंडित किशन महाराज, पंडित समता प्रसाद (गुदई महाराज), पंडित अनोखेलाल मिश्र, कंठे महाराज।
  • शहनाई वादन: भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां (विश्व स्तर पर शहनाई को प्रतिष्ठित करने वाले महान संगीतज्ञ)।
  • शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय गायन (ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी): पद्म विभूषण गिरिजा देवी (ठुमरी साम्राज्ञी), रसूलन बाई, बड़ी मोती बाई, सिद्धेश्वरी देवी, विद्याधरी देवी।
  • ख्याल एवं ध्रुपद युगल: पंडित राजन-साजन मिश्र (प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक बंधु)।
  • सितार एवं सारंगी: पंडित रवि शंकर (सितार - मैहर व बनारस से संबद्ध), पंडित गोपाल मिश्र, हनुमान प्रसाद मिश्र (सारंगी)।

3. किराना घराना (Kirana Gharana - शामली/मुजफ्फरनगर)

  • उद्गम स्थल: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना (किराना) कस्बे से इस घराने का नामकरण हुआ।
  • संस्थापक/प्रवर्तक: उस्ताद अब्दुल करीम खां एवं उस्ताद अब्दुल वाहिद खां।
  • गायन शैली की विशेषता: यह ख्याल गायकी (Khayal Singing) का अत्यंत कोमल, धीमी गति और स्वरों की शुद्धता पर आधारित घराना है। इसमें स्वरों के लगाव और कण-प्रयोग पर विशेष बल दिया जाता है।
  • प्रमुख ख्यातिप्राप्त कलाकार:
    • पंडित भीमसेन जोशी (भारत रत्न प्राप्त महान शास्त्रीय गायक)।
    • गंगूबाई हंगल (प्रसिद्ध ख्याल गायिका)।
    • सवाई गंधर्व, प्रभा अत्रे, हीराबाई बरोडेकर, बेगम रोशनआरा।

4. अतरौली एवं अन्य प्रमुख घराने (Atrauli & Other Gharanas)

संगीत घराना संस्थापक / प्रवर्तक प्रमुख विधा / विशेषता प्रमुख प्रसिद्ध कलाकार
अतरौली घराना (जयपुर-अतरौली) उस्ताद अल्लादिया खां (अलीगढ़) ध्रुपद-धमार एवं जटिल ख्याल गायकी, वक्र तानें मल्लिकाअर्जुन मंसूर, किशोरी अमोनकर, केसरबाई केरकर, श्रुति सडोलीकर।
आगरा घराना (रंगीला घराना) हाजी सुजान खां / उस्ताद फैयाज खां ध्रुपद-धमार और ख्याल का सम्मिश्रण (खुली आवाज) उस्ताद फैयाज खां (ज्ञानरत्न/आफताब-ए-मौसिकी), विलायत हुसैन खां, भास्कर राव बखले।
फतेहपुर सीकरी घराना जैनू खां एवं जोरावर खां ध्रुपद व ख्याल गायन घसीट खां, छोटे खां।
सहारनपुर घराना खलीफा मुहम्मद जमा शुद्ध राग गायन एवं सूफी प्रभाव बंदे अली खां (प्रसिद्ध बीनकार/रुद्रवीणा वादक)।
इटावा घराना (गौरीपुर घराना) उस्ताद इमदाद खां सितार एवं सुरबहार वादन (इमदादखानी शैली) उस्ताद इनायत खां, उस्ताद विलायत खां (विश्वविख्यात सितार वादक)।
🎯 परीक्षा में सीधे पूछे जाने वाले 5 निर्णायक फैक्ट्स:
  • किराना घराना संस्थापक: उस्ताद अब्दुल करीम खां (कैराना, शामली)। प्रसिद्ध गायक: पंडित भीमसेन जोशी।
  • गुदई महाराज (समता प्रसाद) व किशन महाराज: बनारस घराने के सुप्रसिद्ध तबला वादक हैं।
  • ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी: बनारस घराने की मूर्धन्य शास्त्रीय गायिका थीं।
  • बिरजू महाराज व बिंदादीन महाराज: कथक नृत्य के लखनऊ घराने से संबंधित हैं।
  • उस्ताद विलायत खां (सितार वादक): इटावा (इमदादखानी) घराने से संबंधित हैं।

परीक्षा में बार-बार पूछे गए अभ्यास प्रश्न (PYQ Practice Set)

प्र. 1. हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध 'किराना घराना' की स्थापना निम्नलिखित में से किसने की थी?

(a) उस्ताद फैयाज खां    (b) उस्ताद अब्दुल करीम खां    (c) पंडित बिंदादीन    (d) उस्ताद अल्लादिया खां
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (b) उस्ताद अब्दुल करीम खां
किराना घराने की स्थापना उस्ताद अब्दुल करीम खां और उस्ताद अब्दुल वाहिद खां ने की थी। इसका नामकरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले में स्थित कैराना कस्बे के नाम पर हुआ है।

प्र. 2. 'गुदई महाराज' के नाम से विख्यात पंडित समता प्रसाद का संबंध किस संगीत घराने एवं वाद्य से है?

(a) लखनऊ घराना - शहनाई    (b) बनारस घराना - तबला    (c) किराना घराना - सितार    (d) आगरा घराना - पखावज
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (b) बनारस घराना - तबला
पंडित समता प्रसाद (उपनाम गुदई महाराज) बनारस घराने के अत्यंत प्रसिद्ध तबला वादक थे। इसी घराने के पंडित किशन महाराज भी विश्वविख्यात तबला वादक रहे हैं।

प्र. 3. ठुमरी की प्रसिद्ध गायिका पद्म विभूषण गिरिजा देवी का संबंध उत्तर प्रदेश के किस घराने से था?

(a) लखनऊ घराना    (b) किराना घराना    (c) बनारस घराना    (d) अतरौली घराना
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (c) बनारस घराना
गिरिजा देवी सेनिया और बनारस घराने की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका थीं। उन्हें 'ठुमरी की रानी/साम्राज्ञी' कहा जाता था। उन्होंने ठुमरी, दादरा, कजरी और चैती गायन को नई ऊंचाइयां दीं।

प्र. 4. भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी शास्त्रीय संगीत के किस घराने से संबंधित थे?

(a) किराना घराना    (b) आगरा घराना    (c) बनारस घराना    (d) ग्वालियर घराना
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (a) किराना घराना
पंडित भीमसेन जोशी किराना घराने के शीर्ष ख्याल गायक थे। वे सवाई गंधर्व के शिष्य थे, जिन्हें वर्ष 2008 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' प्रदान किया गया था।

प्र. 5. सितार एवं सुरबहार वादन के लिए प्रसिद्ध 'इटावा घराना' को अन्य किस नाम से भी जाना जाता है?

(a) रंगीला घराना    (b) इमदादखानी घराना    (c) सेनिया घराना    (d) कव्वाल बच्चा घराना
उत्तर एवं व्याख्या
उत्तर: (b) इमदादखानी घराना
इटावा घराने के प्रवर्तक उस्ताद इमदाद खां थे, इसलिए इसे 'इमदादखानी घराना' भी कहा जाता है। महान सितार वादक उस्ताद विलायत खां इसी परंपरा के प्रतिनिधि रहे हैं।
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